Gopal Gupta

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नज्म -ऐ - हयात

कुछ ख़्वाब सुहाने बैठे हैं , आँखों मे पलको के पीछे,,

वो खींच रहे  हैं  तस्वीरें ,
आने वाले मधुरिम कल की,,

जैसे सागर की सीपी  के ,
अन्तस में  मोती पलता है,,

ऐसा ही यह जीवन अपना,
कुछ लक्ष्य साध के चलता है,,

कुछ ख़्वाब सुहाने बैठे हैं , आँखों मे पलको के पीछे,,
बात वही  तो   मौन कहे है,,

गीत हमारी इस धड़कन का,
आती   जाती   रात   कहे है,,

कहता कवि मानस की पीड़ा,
अपनी पीड़ा का क्या कहना,,
कुछ ख़्वाब सुहाने बैठे हैं , आँखों मे पलको के पीछे,,
कर्मो से राम बने अपने,
हैं कृष्ण बने निज कर्मो से,,

कहता गीता का ज्ञान यही,
है मानव तेरा धर्म यही,,

 पथ  बाधाओं से भरा हुआ,
जीवन कितना है सरल करे,,

अविराम बहे उर की गंगा
हम ठान यही  प्रण बैठे हैं
कुछ ख़्वाब सुहाने बैठे हैं , आँखों मे पलको के पीछे,,


 Gopal Gupta "Gopal"

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7 Comments

बेहतरीन अभिव्यक्ति और खूबसूरत भाव

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Rupesh Kumar

22-Dec-2023 04:09 PM

V nice

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Gunjan Kamal

22-Dec-2023 02:44 PM

👏👌

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